ईरान और पश्चित एशिया संकट का असर अब खुलकर सामने आ गया है. पेट्रोलियम कंपनियों ने शुक्रवार सुबह डीजल और पेट्रोल के दाम 3 रुपये लीटर बढ़ा दिए हैं. पेट्रोल का इस्तेमाल तो फिर भी ज्यादातर पर्सनल यूज के लिए होता है, लेकिन डीजल की सबसे ज्यादा खपत परिवहन और माल ढुलाई में होती है. यही वजह है कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल का दाम बढ़ना ज्यादा खलता है. आम आदमी की बात करें तो डीजल के दाम बढ़ने से उस पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, क्योंक यह सीधे तौर रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा होता है.
अनाज से लेकर सब्जी और फलों तक की ढुलाई ट्रक और पिकअप से होती है, जिसमें ईंधन के तौर पर डीजल का ही इस्तेमाल होता है. यही कारण है कि अगर डीजल का रेट 1 रुपये बढ़ता है जो इससे खुदरा महंगाई सीधे तौर से प्रभावित होती है. यहां तो डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुकी है, जिससे महंगाई पर इसका असर भी ज्यादा होने वाला है. अगर आप सोच रहे हैं कि इससे महंगाई कितनी बढ़ेगी तो यहां सामान्य कैलकुलेशन से आपको सारी बातें बहुत आसानी से समझ आ जाएंगी.
1 रुपये डीजल महंगा तो कितनी बढ़ेगी महंगाई
डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जो खाने-पीने की चीजों पर असर डालता है और गरीब-अमीर सभी पर इसका असर दिखता है. अगर डीजल की कीमतों में 1 रुपये प्रति लीटर की भी बढ़ोतरी होती है तो इससे खुदरा महंगाई करीब 0.06 फीसदी तक बढ़ सकती है. इसका मतलब है कि डीजल अभी 3 रुपये महंगा हुआ है तो खुदरा महंगाई में करीब 0.18 फीसदी का उछाल आ सकता है. थोक महंगाई तो पहले ही साढ़े 3 साल के हाई लेवल पर पहुंच चुकी है. अब इसका असर खुदरा महंगाई पर भी दिखेगा और साथ में डीजल की कीमतें बढ़ने का भी असर दिखेगा.




