छुरिया–डोंगरगांव चौड़ीकरण पर कौन उठाएगा आवाज?
कुमर्दा–गैंदाटोला सड़क पर श्रेय लेने की होड़, लेकिन छुरिया–डोंगरगांव मार्ग की बदहाली पर क्यों खामोश हैं नेता?
छुरिया। क्षेत्र में कुमर्दा–गैंदाटोला सड़क निर्माण की घोषणा के बाद बधाई और आभार संदेशों की बाढ़ आई हुई है। कई नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता इस उपलब्धि का श्रेय लेने में जुटे हुए हैं। लेकिन इसी बीच क्षेत्र की जनता एक बड़ा सवाल पूछ रही है कि जो लोग कुमर्दा–गैंदाटोला सड़क के लिए श्रेय लेने में सबसे आगे हैं, वे छुरिया–डोंगरगांव मार्ग की बदहाल स्थिति पर कब आवाज उठाएंगे?
छुरिया–डोंगरगांव मार्ग क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है। प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं। बढ़ते यातायात, संकरी सड़क और लगातार बढ़ रहे दुर्घटना के खतरे के बावजूद चौड़ीकरण की मांग वर्षों से लंबित है। इसके बावजूद इस मुद्दे को लेकर न कोई बड़ा आंदोलन दिखाई देता है और न ही कोई गंभीर राजनीतिक पहल।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण की घोषणा का स्वागत होना चाहिए, लेकिन जनता को यह भी जानने का अधिकार है कि छुरिया–डोंगरगांव सड़क के चौड़ीकरण के लिए आखिर कौन आगे आएगा? जो लोग आज नई सड़क की घोषणा पर श्रेय लेने की राजनीति कर रहे हैं, वे वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर अब तक क्या प्रयास कर पाए हैं?
लोगों का कहना है कि कुमर्दा–गैंदाटोला सड़क पर फोटो, पोस्टर और बधाई संदेश देने वाले नेताओं को छुरिया–डोंगरगांव मार्ग की वास्तविक स्थिति भी देखनी चाहिए। यह मार्ग केवल सड़क नहीं बल्कि हजारों ग्रामीणों, किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की जीवनरेखा है। इसके बावजूद यह मुद्दा राजनीतिक प्राथमिकताओं में कहीं नजर नहीं आता।
क्षेत्र में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि “क्रेडिट लेने वाले नेता आखिर छुरिया–डोंगरगांव सड़क चौड़ीकरण का क्रेडिट लेने के लिए कब संघर्ष करेंगे?” जनता का कहना है कि केवल तैयार परियोजनाओं पर श्रेय लेना आसान है, लेकिन वास्तविक जनहित के मुद्दों के लिए संघर्ष करना ही जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की असली परीक्षा होती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर प्रयास करें तो छुरिया–डोंगरगांव सड़क चौड़ीकरण की मांग भी जल्द पूरी हो सकती है। लेकिन फिलहाल जनता को यह देखकर निराशा हो रही है कि सड़क पर परेशानी झेलने वाली जनता पीछे है और श्रेय की राजनीति आगे।
अब जनता का सीधा सवाल है—कुमर्दा–गैंदाटोला सड़क के लिए क्रेडिट लेने वालों, छुरिया–डोंगरगांव सड़क चौड़ीकरण के लिए संघर्ष का क्रेडिट कब लोगे? यही सवाल आज क्षेत्र के चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है




