छत्तीसगढ़

कुपोषण और एनीमिया से जूझने वाली महिला बनी स्वास्थ्य जागरूकता की मिसाल

बेमेतरा जिले के बेरला परियोजना अंतर्गत ग्राम देवरी की निवासी श्रीमती लीला निषाद आज अपने गांव की महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जागरूकता की प्रेरक मिसाल बन गई हैं। कभी कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने वाली लीला का जीवन राष्ट्रीय पोषण माह अभियान से जुड़ने के बाद सकारात्मक रूप से बदल गया।

लीला निषाद का विवाह ग्राम देवरी निवासी श्री भागीरथी निषाद से हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के अभाव में वर्ष 2017 में उन्होंने एक कुपोषित बच्चे को जन्म दिया, जिसकी जन्म के कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद उनका स्वास्थ्य भी लगातार गिरता गया और जांच में वे एनीमिया से ग्रस्त पाई गईं।

इसी दौरान गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अमरौतिन साहू ने उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय पोषण माह के पोषण मेले में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। मेले में लीला को संतुलित आहार, हरी सब्जियों, दालों, फलों के महत्व तथा आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड के नियमित सेवन की जानकारी दी गई। इसके बाद लीला ने अपनी जीवनशैली में बदलाव करते हुए संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और स्वच्छता को अपनाया। गर्भवती होने पर उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी सभी सावधानियों का पालन किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया।

आज लीला निषाद स्वयं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ-साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही जानकारी और जनभागीदारी से सरकारी अभियान लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

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