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ईरान ने बना लिया न्यूक्लियर से भी खतरनाक ‘हथियार’, AI का भी बाप है BI! अमेरिका से आगे निकला दुश्मन

अमेरिका, ईरान के न्यूक्लियर हथियार के पीछे पड़ा है. इस हथियार की वजह से ही मिडिल ईस्ट के देशों ने मिसाइल-ड्रोन अटैक झेली हैं. हालांकि, अब इसी पर समझौता हो गया है और जंग खत्म होने की कगार पर है लेकिन इस बीच एक ऐसी खबर आई है, जो अमेरिका के लिए किसी झटके से कम नहीं होगी. ईरान ने कुछ ऐसा तैयार कर लिया है, जो गलत हाथों में पहुंच जाए तो न्यूक्लियर हथियार से भी खतरनाक साबित हो सकता है. ईरान का ये नया आविष्कार ‘आर्टिफिशियल दिमाग’ है, जो AI नहीं बल्कि BI है, यानी ‘बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस’. ये कोई साधारण कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि जिंदा इंसानी न्यूरॉन्स से बना एक ऐसा नेटवर्क है जो खुद फैसले ले सकता है और इंसानी दिमाग की तरह ही नई चीजें सीख सकता है.

ईरान ने बना लिया AI का बाप!

ये कोई साधारण कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि जिंदा इंसानी न्यूरॉन्स से बना एक ऐसा नेटवर्क है जो खुद फैसले ले सकता है और इंसानी दिमाग की तरह ही नई चीजें सीख सकता है. ईरान के वैज्ञानिकों ने इसे लैब के अंदर इंसानी कोशिकाओं का इस्तेमाल करके तैयार किया है, जो देखने में एक छोटे इंसानी दिमाग की तरह है. इसके साथ ईरान ने ‘ऑर्गेनॉइड इंटेलिजेंस’ की वैश्विक रेस में एंट्री मारकर अमेरिका और पश्चिमी देशों को सीधे चुनौती दे दी है, जिससे अब पूरी दुनिया का पावर बैलेंस बदलने वाला है.

क्या है ये जिंदा दिमाग का खेल?

ईरान की ब्रेन रिसर्च और टेक्नोलॉजी टीम के चीफ अताउल्लाह पोर-अब्बासी ने मीडिया को एक बेहद चौंकाने वाला इंटरव्यू दिया है. उन्होंने बताया कि ईरान ने शरीर के बाहर नसों की कोशिकाओं को न सिर्फ जीवित रखने की बल्कि उन्हें विकसित करने की पूरी तकनीक अपने दम पर हासिल कर ली है. ये जिंदा कोशिकाएं लैब के अंदर ठीक उसी तरह आपस में संपर्क बना रही हैं और अपना नेटवर्क तैयार कर रही हैं, जैसे हमारे और आपके सिर के अंदर मौजूद असली दिमाग में होता है. सबसे ज्यादा डराने वाली बात ये है कि इस नेटवर्क के पास खुद से सीखने की अद्भुत क्षमता है. यानी ये दिमाग बिना किसी मानवीय कोडिंग के, खुद के अनुभवों से सीख रहा है

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