डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक तनाव से बना हुआ है. कभी टैरिफ तो कभी रूसी तेल न खरीदने की धमकी. लेकिन अब इसी अमेरिका से भारत के लिए खुशखबरी आई है. अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) ने भरोसा दिया है कि वो फाइटर जेट ‘तेजस मार्क 1A’ बना रही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 20 जहाजों के इंजन इसी साल सौंप देगी. भारत वर्षों से इन इंजन के इंतजार में था.
HAL के चेयरमैन डीके सुनील ने बताया कि ‘तेजस मार्क 1A’ के इंजनों की आपूर्ति में हो रही देरी अब खत्म होने वाली है. उन्होंने बताया कि इस महीने के अंत तक छठा इंजन भारत पहुंच जाएगा, जिससे विमानों की तैयारी में तेजी आएगी. ANI से बात करते हुए डीके सुनील ने कहा कि वर्तमान में HAL के पास पांच इंजन मौजूद हैं और छठा इंजन पिकअप के लिए तैयार है.
और इंजन मिलने की संभावना
डीके सुनील ने बताया कि वे हाल ही में जनरल इलेक्ट्रिक का दौरा करके आए हैं. जनरल इलेक्ट्रिक के अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जून से दिसंबर के बीच वे हमें 20 इंजन सौंप देंगे. यह एक पेसिमिस्टिक यानी कम से कम संख्या है. उन्होंने मुझे बताया है कि वे इससे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और अधिक इंजन दे सकते हैं. चेयरमैन ने उम्मीद जताई कि इस महीने के अंत तक HAL के पास इंजनों से लैस छह विमान पूरी तरह तैयार होंगे.
देरी के लिए GE पर लगेगा जुर्माना
इंजनों की सप्लाई में हुई देरी के कारण तेजस Mk1A कार्यक्रम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. इसे देखते हुए HAL ने कड़ा रुख अपनाया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कांट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार, देरी के लिए GE एविएशन पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा रहा है. HAL की प्रोडक्शन लाइन पूरी तरह तैयार है, लेकिन अंतिम असेंबली इंजनों की उपलब्धता पर टिकी हुई है। गौरतलब है कि पहले डिलीवरी मार्च 2026 में शुरू होनी थी, जो सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण टलती रही है।
वायुसेना वर्षों से कर रही डिमांड
वर्तमान में HAL के पास पांच विमान इंजनों के साथ तैयार हैं, लेकिन अभी तक एक भी विमान भारतीय वायुसेना को नहीं सौंपा गया है. भारतीय वायुसेना मई 2026 में LCA Mk1A कार्यक्रम की समीक्षा करेगी. समीक्षा के बाद ही वायुसेना इन विमानों की डिलीवरी स्वीकार करने पर फैसला लेगी. वायुसेना ने कुल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है. 20 इंजनों की यह खेप मिलने से न केवल प्रोजेक्ट को संजीवनी मिलेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की ताकत को भी नया विस्तार मिलेगा.




